*मुक्त-मुक्तक : 608 - याद के शोलों में.........


याद के शोलों में ख़ुद को 
फूँकता है आज भी ॥
तू नहीं फिर भी तुझे दिल 
ढूँढता है आज भी ॥
जाते-जाते वो तेरा 
मुझको बुलाना चीखकर ,
रात-दिन कानों में मेरे 
गूँजता है आज भी ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

मुक्त ग़ज़ल : 267 - तोप से बंदूक