Sunday, October 5, 2014

*मुक्त-मुक्तक : 608 - याद के शोलों में.........


याद के शोलों में ख़ुद को 
फूँकता है आज भी ॥
तू नहीं फिर भी तुझे दिल 
ढूँढता है आज भी ॥
जाते-जाते वो तेरा 
मुझको बुलाना चीखकर ,
रात-दिन कानों में मेरे 
गूँजता है आज भी ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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मुक्तक : 941 - बेवड़ा

लोग चलते रहे , दौड़ते भी रहे ,  कोई उड़ता रहा , मैं खड़ा रह गया ।। बाद जाने के तेरे मैं ऐसी जगह ,  जो गिरा तो पड़ा का पड़ा रह गया ।...