*मुक्त-मुक्तक : 607 - कम से कम में भी ज़्यादा.......


कम से कम में भी ज़्यादा लुत्फ़ उठाकर निकले ॥ 
अपने चादर से कभी पाँव न बाहर निकले ॥ 
चाँद सूरज की तमन्नाएँ न पालीं हमने ,
जुगनुओं से बख़ूबी काम चलाकर निकले ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

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