*मुक्त-मुक्तक : 618 - तुम जलाते हो तब भी.......


तुम जलाते हो तब भी तुमको जला कहना है !!
तुम गलाते हो फिर भी तुमको गला कहना है !!
जानता हूँ मैं तुम बुरे हो मगर चाहत में ,
मुझको ना चाहकर भी तुमको भला कहना है !!
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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