*मुक्त-मुक्तक : 617 - उसकी हसीन शक्ल...........


उसकी हसीन शक्ल 
दिल को लूट न जाती !
वो हाथ आते-आते 
छिटक-छूट न जाती !
बनते ही बनते मेरी 
ज़िंदगानी अर्श से ,
शीशे सी गिर ज़मीं पे 
टूट–फूट न जाती !
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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धन्यवाद ! Lekhika Pari M Shlok जी !

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