*मुक्त-मुक्तक : 616 - न कोई अमीर-ऊमरा.........


न कोई अमीर-ऊमरा 
न मुफ़्लिसो-ग़रीब ॥
फटका न पास का 
न कोई दूर का क़रीब ॥
कोई भरे बज़ार भी 
मिला न ख़रीदार ,
बैठा जो मुफ़्त में भी 
अपना बेचने नसीब ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति  

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