152 : ग़ज़ल – जो सबसे जुदा है............


जो मेरा ख़ुदा है , वो सबसे जुदा है ॥
वो सबसे जुदा है , जो मेरा ख़ुदा है ॥
बड़ी अलहदा है , जो उसकी अदा है ,
जो उसकी अदा है , बड़ी अलहदा है ॥
वो मेरा सदा है , जो देता सदा है ,
जो देता सदा है , वो मेरा सदा है ॥
मुझी को बदा है , ये ग़म जो लदा है ॥
ये ग़म जो लदा है , मुझी को बदा है ॥
जो ख़ुद इक ददा है , क्यों दहशतज़दा है ?
क्यों दहशतज़दा है ? जो ख़ुद इक ददा है ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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