*मुक्त-मुक्तक : 602 - दिल के बाशिंदों से..............


दिल के बाशिंदों से मुँह 
मोड़ आये
जाने किस-किस के दिल को 
तोड़ आये ?
जुड़ के रहने का जिनसे 
वादा था ,
उनसे हर एक रिश्ता 
तोड़ आये
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

वाह ...क्या कहने , बहुत ही बढिया
धन्यवाद ! अजय कुमार झा जी !

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