*मुक्त-मुक्तक : 600 - छः को छः.........


छः को छः , सत्ते को बोले 
सात वह
दिन को दिन , रातों को बोले 
रात वह
कैसे मानूँ है नशे में 
धुत्त फिर ,
कर रहा जब होश की हर 
बात वह ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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