*मुक्त-मुक्तक : 599 - मुँह से ज़रा सी रोशनी.........


मुँह से ज़रा सी रोशनी की 
बात थी निकली ॥
उसने गिरा दी हम पे 
कड़कड़ाती ही बिजली ॥
झोली में गिद्ध, चील, बाज 
झट से ला पटके ,
चाही जो हमने इक ज़रा-सी 
प्यारी-सी तितली ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Popular posts from this blog

मुक्त-ग़ज़ल : 256 - मंज़िल

मुक्त-ग़ज़ल : 257 - मक़्बरा......

मुक्त ग़जल : 254 - चोरी चोरी