*मुक्त-मुक्तक : 603 - बेझिझक बाहों में ले........


बेझिझक बाहों में ले 
मुझको जकड़ना क्या हुआ ?
सारी दुनिया से मेरी 
ख़ातिर झगड़ना क्या हुआ ?
मेरी छोटी सी ख़ुशी के 
वास्ते लंबी दुआ ,
पीर की चौखट पे वो 
माथा रगड़ना क्या हुआ ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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