*मुक्त-मुक्तक : 592 - इक बार हमने सचमुच..........



इक बार हमने सचमुच 
इतनी शराब पी थी ॥
इक घूँट में दो प्यालों 
जितनी शराब पी थी ॥
यारों का दोस्ती की 
सर पर क़सम था धरना ,
फिर होश न रहा कुछ 
कितनी शराब पी थी ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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