मुक्तक : 593 - यूँ ही सी नहीं कोई.............


यूँ ही सी नहीं कोई 
मुसीबत से सामना ॥
करता हूँ नई रोज़ 
अजीयत से सामना ॥
यूँ भी न समझ दर्द 
उठाता हूँ हो खफ़ा ,
करता हूँ तह-ए-दिल से , 
बीयत से सामना ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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