*मुक्त-मुक्तक : 587 - दिन को कह दे रात.......


दिन को कह दे रात 
कोई रात लगती है ॥
सूखे को बरसात तो 
बरसात लगती है ॥
हमको जो सुनना अगर 
कह दे वही कोई ,
झूठ भी हो वो तो सच्ची 
बात लगती है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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