*मुक्त-मुक्तक : 585 - मुझे तो तेरी तबीयत.........


मुझे तो तेरी तबीयत ख़राब लगती है ॥
मेरी दवा है जो तुझको शराब लगती है ॥
हलक़ उतरते ही जब ये दिमाग़ पर चढ़ती ,
हयाते ख़ार भी गुलगुलाब लगती है ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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