*मुक्त-मुक्तक : 580 - आर्ज़ू रखता नहीं.......


आर्ज़ू रखता नहीं कुछ ख़्वाब भी बुनता नहीं ॥
बाग़ के काँटे निकालूँ गुल-कली चुनता नहीं ॥
*ख़ुशमनिश हूँ मैं *मुरीदे-मर्सिया *हैरानगी ,
*शादमानी में भी *नग्माख़ुशी सुनता नहीं ॥
( *ख़ुशमनिश=प्रसन्नचित्त व्यक्ति  *मुरीदे-मर्सिया=शोकगीत प्रेमी *हैरानगी=आश्चर्य *शादमानी=प्रसन्नता का अवसर  *नग्माख़ुशी=हर्षगीत )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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