मुक्त-मुक्तक : 576 - सोने से ज़्यादा उनकी.........


सोने से ज़्यादा उनकी 
नज़र में खरा रहूँ ॥
पीला कभी पड़ूँ न 
हरा ही हरा रहूँ ॥
मैं क्या करूँ कि जेहनो-
दिल में दुश्मनों के भी ,
कलसे में गंगा-जल सा 
लबालब भरा रहूँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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