मुक्त-मुक्तक : 575 - सब चने लोहे के.......


सब चने लोहे के 
केले से चबा लूँगा ॥
उनके आगे अपने 
दर्दो-ग़म दबा लूँगा ॥
ज़ोर देकर गर वो 
मेरा हाल पूछेंगे ,
बेतरह हँस-हँस के 
आँखें डबडबा लूँगा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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