मुक्त-मुक्तक :574 - इस पर हँसूँ मैं या चिढ़ूँ ............


इस पर हँसूँ मैं या चिढ़ूँ 
कि फिर करूँ इताब ?
उम्मी को दे रहे हो 
तोहफ़े में जो किताब !!
डरता है मौत से वो 
जैसे बच्चे भूत देख ,
जाँबाज़ का उसे ही तुम 
नवाज़ते ख़िताब !!
[ इताब=क्रोध,ग़ुस्सा...उम्मी=निरक्षर,अनपढ़ ]
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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