मुक्त-मुक्तक : 567 – गुल तो गुल गुलशन...............


गुल तो गुल गुलशन का गुञ्चा-
गुञ्चा भी घबराया है ॥
तेरा चेहरा खिला-खिला क्यों
ज़रा नहीं कुम्हलाया है ॥
तू तो ख़ुशबूदार है सबसे 
फिर भी क्यों बेफ़िक्र है तू ?
क्या तू जाने ? एक शख़्स याँ 
इत्र बनाने आया है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

सिर काटेंगे