मुक्त-मुक्तक : 566 - डूब चलों की गोद में.........


डूब चलों की गोद में लाकर 
साहिल दे दें ॥
पथभ्रष्टों के पाँव तले बस 
मंज़िल दे दें ॥
सच कहता हूँ जान बूझकर 
या भूले गर ,
तुम जैसे हम जैसों को 
अपना दिल दे दें ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

धन्यवाद ! संजय भास्कर जी !

Popular posts from this blog

मुक्त-ग़ज़ल : 256 - मंज़िल

मुक्त-ग़ज़ल : 257 - मक़्बरा......

मुक्त ग़जल : 254 - चोरी चोरी