मुक्त-मुक्तक : 563 - पूर्ण पृथ्वी जिसका आँगन.......


पूर्ण पृथ्वी जिसका आँगन हो गगन छप्पर ॥
एक इतना ही बड़ा अद्भुत बनाएँ घर ॥
विश्वजन चिरकाल तक आनंद से जिसमें ,
प्रेम से , ईमानदारी से रहें मिलकर ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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बेहद उम्दा रचना और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई..

सच कहती पंक्तियाँ .
Recent Post …..दिन में फैली ख़ामोशी
धन्यवाद ! संजय भास्कर !

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