मुक्त-मुक्तक : 562 - कभी उनसे से ज़रा...............



कभी उनसे से ज़रा मिल जाएँ पल दो पल निगाहें ॥

हो बेक़ाबू मेरा दिल घंटों - घंटों भरता आहें ॥


क़दम उन तक पहुँचने को बदल जाएँ परों में ,


सटा लेती हैं सीने से उन्हें ख़्वाबों में बाहें ॥


-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

धन्यवाद ! आशा जोगलेकर जी !
वाह...बहुत सुंदर...
धन्यवाद ! रश्मि शर्मा जी !

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