147 : मुक्त-ग़ज़ल - ग़ज़लों में आँसू.........


ग़ज़लों में आँसू बोता हूँ ॥
लेकिन तुझको ना रोता हूँ ॥
तेरी भारी भरकम यादें ,
फूल सरीखा मैं ढोता हूँ ॥
तू है राम-नाम सा मुझको ,
मैं तेरा रट्टू तोता हूँ ॥
एक तेरा क्या हो बैठा मैं ,
और किसी का कब होता हूँ ?
नींद नहीं आती है मुझको ,
सोने को बेशक़ सोता हूँ ॥
तू मुझमें गुम-गुम जाता है ,
मैं तुझमें ख़ुद को खोता हूँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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