मुक्त-मुक्तक : 559 - यों बुलायी अपने हाथों........


यों बुलायी अपने हाथों 
सबकी शामत ॥
बिल्लियों की देख चूहों 
से मोहब्बत ॥
अहमक़ों ने शेर के 
हाथों में अपने,
भेड़ ,बकरों ,हिरनों की 
दे दी हिफाज़त ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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