मुक्त-मुक्तक : 557 - अपने ही दफ्न को..........


अपने ही दफ्न को 
मरघट आए हुए ॥
ख़ुद का काँधों पे 
मुर्दा उठाए हुए ॥
देखिए बेबसी 
ये हमारी कि हम ,
खिलखिलाते हैं 
आँसू छिपाए हुए ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Popular posts from this blog

मुक्त-ग़ज़ल : 262 - पागल सरीखा

विवाह अभिनंदन पत्र

मुक्त-ग़ज़ल : 264 - पेचोख़म