मुक्त-मुक्तक : 556 - न पोर्च न बरामदा.............


न पोर्च न बरामदा 
न लान दोस्तों ॥
हरगिज़ न देखने में 
आलीशान दोस्तों ॥
जन्नत से कम नहीं है
 मगर मेरे वास्ते ,
घर मेरा बस दो कमरों का 
मकान दोस्तों ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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