मुक्त-मुक्तक : 555 - हुस्न की अब क्या तेरे................


हुस्न की अब क्या तेरे 
तारीफ़ में कहना ?
लेक जब लब आ गई 
ख़ामोश क्यों रहना ?
तेरे आगे मुफ़्त मिट्टी 
के सभी ढेले ,
तू खरे सोने का वज़्नी 
क़ीमती गहना ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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