*मुक्त-मुक्तक : 554 - मंदिरों में मस्जिदों में रूहो.................


मंदिरों में मस्जिदों में रूहो - दिल में जो ख़ुदा ॥
एक ही सब शक्लों में है ईश हो या वो ख़ुदा ॥
एक दिन हो जाएँगे ऐसे तो लाखों दोस्तों ,
कितना भी अच्छा हो इंसाँ उसको मत बोलो ख़ुदा ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

कहानी : एक नास्तिक की तीर्थ यात्रा