*मुक्त-मुक्तक : 551 - अपने हुनर-ओ-फ़न का.........


अपने हुनर-ओ-फ़न का 
पूरा करके इस्तेमाल ॥
उसने दिखाया हमको इक 
बहुत बड़ा क़माल ॥
कल तक वो पैसे-पैसे का 
मोहताज, नामचीन
बन बैठा आज रातों रात 
अमीर मालामाल ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (23-06-2014) को "जिन्दगी तेरी फिजूलखर्ची" (चर्चा मंच 1652) पर भी होगी!
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (23-06-2014) को "जिन्दगी तेरी फिजूलखर्ची" (चर्चा मंच 1652) पर भी होगी!
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
Pratibha Verma said…
बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
धन्यवाद ! मयंक जी !
धन्यवाद ! Pratibha Verma जी !

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