*मुक्त-मुक्तक : 550 - पोखर के गंदे पानी को.............


पोखर के गंदे पानी को 
कह डाल गंगा-जल ॥
खुर जैसे पंजों को भी तू 
कह ले चरण-कमल ॥
पर चापलूस ये तो 
ख़ुशामद की हद ही है ,
मतलब को तू गधे से 
बाप को करे बदल !!
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

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