*मुक्त-मुक्तक : 546 - उसके अंदर में क्या...............

उसके अंदर में क्या 
मंजर दिखाई देता है ?
बिखरे कमरे से सिमटा 
घर दिखाई देता है ॥
जबसे सीखी है बिना 
शर्त परस्तिश उसने ,
बंदा बेहतर से भी 
बेहतर दिखाई देता है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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वाह एक एक लफ्ज़ बहुत ख़ूबसूरती से इस गज़ल की उम्दाय्गी बढ़ा रहा है. हमेशा की तरह ये भी एक सुंदर कृति.
आपका बहुत बहुत धन्यवाद ! संजयभास्कर जी !

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