*मुक्त-मुक्तक : 543 - पीते हैं वो तो कहते हैं................


पीते हैं वो तो कहते हैं 
करते हैं ग़म ग़लत ॥
हम छू भी लें तो बोलेंगे 
करते हैं हम ग़लत ॥
हालात उनसे इस क़दर 
ख़राब हैं अपने ,
हमको तो ये लगता है कि 
चलता है दम ग़लत ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (17-06-2014) को "अपनी मंजिल और आपकी तलाश" (चर्चा मंच-1646) पर भी होगी!
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
धन्यवाद ! मयंक जी !
Pratibha Verma said…
बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
सुंदर व अर्थपूर्ण पंक्तियां...
Smita Singh said…
बढ़िया।
धन्यवाद ! Pratibha Verma जी !
धन्यवाद ! संजय भास्कर जी !
Vaanbhatt said…
उम्दा प्रस्तुति...

Popular posts from this blog

मुक्त-ग़ज़ल : 256 - मंज़िल

मुक्त-ग़ज़ल : 257 - मक़्बरा......

मुक्त ग़जल : 254 - चोरी चोरी