*मुक्त-मुक्तक : 541 - सच कहा लेकिन अधूरा...................


सच कहा लेकिन अधूरा 
चाहे जिसने कह दिया ॥
कितने-कितने,इसने-उसने,
जिसने-तिसने कह दिया ॥
और भी हैं ढेरों ज़िम्मेदारियाँ 
इससे अहम ,
है जवानी इश्क़ को ही 
तुझसे किसने कह दिया ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

लाजवाब ......बहुत सुन्दरता के साथ पेश किया है !!
धन्यवाद ! संजय भास्कर जी !

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

मुक्त-ग़ज़ल : 262 - पागल सरीखा

मुक्त-ग़ज़ल : 264 - पेचोख़म