*मुक्त-मुक्तक : 538 - ऐसा करूँ धमाल...............


ऐसा करूँ धमाल  
धूम सालगिरह पे ॥
ऐसा दिखाऊँ रक़्स 
झूम सालगिरह पे ॥
इतना हूँ ख़ुश कि आज तो 
जी है अदू के भी ,
जाकर के लिपट जाऊँ 
चूम सालगिरह पे ॥
( अदू = शत्रु , दुश्मन )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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