*मुक्त-मुक्तक : 536 - मत कह बबूल मुझको.............


मत कह बबूल मुझको छोटा हूँ बेर से भी ॥
झूठा हूँ बालकों सा लेकिन नहीं फ़रेबी ॥
खंभों की तरह मैंने माना नहीं हूँ सीधा ,
मत कर मगर मुनादी दावे से हूँ जलेबी ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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