*मुक्त-मुक्तक : 532 - याद तेरी जहाँ पे...............


याद तेरी जहाँ पे 
मुझको तड़फड़ाती है II
आँख जिस जा पे जा के 
आँसू टपटपाती है II 
मुझको जाना न चाहिए 
वहाँ कभी लेकिन ,
चाल मेरी मेरे 
क़दम वहीँ बढ़ाती है II
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

लाजवाब प्रस्तुति...
नयी पोस्ट@बधाई/उफ़ ! ये समाचार चैनल
नयी पोस्ट@बड़ी दूर से आये हैं
धन्यवाद ! Prasanna Badan जी !

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