Thursday, May 29, 2014

*मुक्त-मुक्तक : 532 - याद तेरी जहाँ पे...............


याद तेरी जहाँ पे 
मुझको तड़फड़ाती है II
आँख जिस जा पे जा के 
आँसू टपटपाती है II 
मुझको जाना न चाहिए 
वहाँ कभी लेकिन ,
चाल मेरी मेरे 
क़दम वहीँ बढ़ाती है II
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Monday, May 26, 2014

*मुक्त-मुक्तक : 531 - कर देंगे ख़ूब अच्छा.............


कर देंगे ख़ूब-अच्छा , भरपूर-प्यारा आलम II
है जो अभी बुरा सा दिखता हमारा आलम II
वादे पे उनके ठेका अब दे दिया है देखें ,
रक्खेंगे ज्यों का त्यों या बदलेंगे सारा आलम II
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

ग़ज़ल : 285 - बदनसीब हरगिज़ न हो

चोर हो , डाकू हो , क़ातिल हो , ग़रीब हरगिज़ न हो ।। आदमी कुछ हो , न हो बस , बदनसीब हरगिज़ न हो ।। ज़िंदगी उस शख़्स की , क्या ज़िंदगी है दो...