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Showing posts from May, 2014

*मुक्त-मुक्तक : 532 - याद तेरी जहाँ पे...............

याद तेरी जहाँ पे 
मुझको तड़फड़ाती है II आँख जिस जा पे जा के 
आँसू टपटपाती है II  मुझको जाना न चाहिए 
वहाँ कभी लेकिन , चाल मेरी मेरे 
क़दम वहीँ बढ़ाती है II -डॉ. हीरालाल प्रजापति 

*मुक्त-मुक्तक : 531 - कर देंगे ख़ूब अच्छा.............

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कर देंगे ख़ूब-अच्छा , भरपूर-प्यारा आलम II है जो अभी बुरा सा दिखता हमारा आलम II वादे पे उनके ठेका अब दे दिया है देखें , रक्खेंगे ज्यों का त्यों या बदलेंगे सारा आलम II -डॉ. हीरालाल प्रजापति