*मुक्त-मुक्तक : 530 - यूँ तो कभी हम आँख............


यूँ तो कभी हम आँख को अपनी 
भूले न नम करते हैं II
और ज़रा सी , छोटी सी बातों 
पर भी न ग़म करते हैं II
हम न तड़पते ग़ैर जिगर में 
तीर चुभोते तब भी ,
होती बड़ी तक्लीफ़ है तब जब 
अपने सितम करते हैं II
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Anonymous said…
Oh my goodness! Incredible article dude! Thank you, However I am going
through troubles with your RSS. I don't know why I
can't subscribe to it. Is there anyone else having similar RSS problems?
Anybody who knows the answer can you kindly respond? Thanks!!


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