*मुक्त-मुक्तक : 529 - जब अपना ख़्वाब टूटा.............


जब अपना ख़्वाब टूटा 
बड़ा दिल का ग़म बढ़ा II
तब मरते कहकहों का 
यकायक ही दम बढ़ा II
जीने को और-और भी 
मरने लगे अपन ,
जब ज़ुल्म ज़िन्दगी पे हुआ 
जब सितम बढ़ा II
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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