*मुक्त-मुक्तक : 525 - क्या वाँ यहाँ क्या सारे ही..................


क्या वाँ यहाँ क्या सारे ही
 जहान में पड़े II
ख़ालिस दिखावे झूठ-मूठ 
शान में पड़े II
औरों की नाँह अपनी ही 
वजह कमाल है ,
ऊँचे से ऊँचे लोग भी 
ढलान में पड़े II
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Shikha Gupta said…
"ऊँचे से ऊँचे लोग भी ढलान में पड़े".......waah

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