*मुक्त-मुक्तक : 522 - तल्लीन हो , तन्मय हो..........


तल्लीन हो , तन्मय हो स्वयं को भी भूल हम II
पलकों से पहले चुनते थे सब काँटे-शूल हम II
आते थे वो जिस राह से फिर उसपे महकते ,
हाथों से बिछाते थे गुलाबों के फूल हम II

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

मुक्त ग़ज़ल : 267 - तोप से बंदूक