*मुक्त-मुक्तक : 519 - सब ख़ुशी से दूँगा सचमुच..............


सब ख़ुशी से दूँगा सचमुच 
अपना मनमाना तो ले II
तुझको चाहा इस ख़ता का 
मुझसे हर्जाना तो ले II
ढूँढता हूँ तुझको अपना 
सर हथेली पर लिए ,
तू दे तोहफ़ा--दिल
मेरा ये नजराना तो ले II
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

Malhotra Vimmi said…
बेहतरीन प्रस्तुति

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