*मुक्त-मुक्तक : 517 - सब दिल के भोले मुझको...............


सब दिल के भोले मुझको 
बदमाश नज़र आयें ?
तर्रार चुप मुज़र्रद 
अय्याश नज़र आयें ?
कभी मुझको मुर्दे लगने 
लगते हैं सोये से क्यों ?
क्यों सोये लोग मुझको 
कभी लाश नज़र आयें ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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