देवी गीत ....... तेरे दर्शन को आना चाहूँ


तेरे दर्शन को आना चाहूँ पर आऊँगा मैं कैसे माँ ?
पग जाते रहे दोनों मेरे चल पाऊँगा मैं कैसे माँ ?
तेरे दर्शन को आना चाहूँ.................................?
हाथों में शंख चक्र साजै मुखड़े पर तेज रहे पावन ,
सुनता बस आया हूँ तेरा है रूप बड़ा ही मनभावन ,
अब नयनहीन दर्शन तेरे कर पाऊँगा मैं कैसे माँ ?
पग जाते रहे दोनों मेरे चल पाऊँगा मैं कैसे माँ ?
तेरे दर्शन को आना चाहूँ.................................?
सज्जन दुर्जन कोई भी हो जो भी जाये तेरे द्वारे ,
हर ले झट सबके कष्ट करे कल्याण सभी का तू तारे ,
दरबार में तेरे पहुँचे बिन तर पाउँगा मैं कैसे माँ ?
पग जाते रहे दोनों मेरे चल पाऊँगा मैं कैसे माँ ?
तेरे दर्शन को आना चाहूँ.................................?
है शक्ति तेरी भक्ति में बड़ी ध्यानू की लाज धरी तूने ,
गदगद हो वीर शिवाजी को अविजित तलवार वरी तूने ,
बिन तुझको प्रसन्न किये मन के वर पाउँगा मैं कैसे माँ ?
पग जाते रहे दोनों मेरे चल पाऊँगा मैं कैसे माँ ?
तेरे दर्शन को आना चाहूँ.................................?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (01-04-2014) को "स्वप्न का संसार बन कर क्या करूँ" (चर्चा मंच-1562)"बुरा लगता हो तो चर्चा मंच पर आपकी पोस्ट का लिंक नहीं देंगे" (चर्चा मंच-1569) पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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नवसम्वत्सर और चैत्र नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
कामना करता हूँ कि हमेशा हमारे देश में
परस्पर प्रेम और सौहार्द्र बना रहे।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत लाजवाब रचना डॉ० सर , धन्यवाद !
नवीन प्रकाशन -: बुद्धिवर्धक कहानियाँ - ( ~ त्याग में आनंद ~ ) - { Inspiring stories part - 4 }
बहुत सुन्दर
जय माता दी
धन्यवाद ! आशीष भाई जी !
धन्यवाद ! कविता रावत जी !

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