*मुक्त-मुक्तक : 515 - सच में ऐसे सम्हाल.............


सच में 
ऐसे सम्हाल कर रक्खे , 
जाँ के 
जैसे सम्हाल कर रक्खे ,
हमने सब 
तेरे तोहफ़े अब तक I
तूने 
कैसे सम्हाल कर रक्खे ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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वाह...सुन्दर पोस्ट...
नयी पोस्ट@चुनाव का मौसम
धन्यवाद ! Prasanna Badan Chaturvedi जी !

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