*मुक्त-मुक्तक : 514 - इश्क़ में जाने कैसे-कैसे............


इश्क़ में जाने कैसे-कैसे 
पापड़ बेले हैं II
शादी के तो बाद और भी 
विकट झमेले हैं II
पहले लगता था कि अकेलापन 
इक बड़ी सज़ा है ,
अब लगता है हमसे बेहतर 
निपट अकेले हैं II
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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