*मुक्त-मुक्तक : 513 - दुनिया न सही गाँव.................


दुनिया न सही गाँव-
नगर होता तेरा मैं II
आशिक़ न सही दोस्त ही 
अगर होता तेरा मैं II
रहती तसल्ली कुछ जो तुझसे
 रहती निस्बतें ,
दुश्मन ही सही कुछ तो 
मगर होता तेरा मैं II
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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