*मुक्त-मुक्तक : 511 - जैसे कि दे के दीद..................


जैसे कि दे के दीद 
यकायक क़रीब से
बख्शी मिरी इन आँखों को 
जन्नत नसीब से
वैसे ही नज्र कर दो अपनी 
दौलते दिल भी ,
बन जाऊँ मैं अमीर प्यार 
का ग़रीब से
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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धन्यवाद ! राजीव कुमार झा जी !
धन्यवाद ! Tushar Raj Rastogi जी !

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