*मुक्त-मुक्तक : 509 - तुझसे तो शर्तिया थी...............


तुझसे तो शर्तिया थी उम्मीदे वफ़ा मगर II
औरों से भी तू बढ़के निकला बेवफ़ा मगर II
ग़ैरों से दग़ाबाज़ियाँ तो आम बात थी ,
अपनों से भी तू कर सका न रे वफ़ा मगर II
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Yoginder Singh said…
Very nice................
धन्यवाद ! Yoginder Singh जी !

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