*मुक्त-मुक्तक : 508 - कल तक न आये थे................


कल तक न आये थे मगर हम आज दोस्तों ,
आये हैं ऐसे दोस्तों से बाज़ दोस्तों II
लेते न हाथों हाथ न सर पर बिठाते जो ,
करते नहीं जो हमपे फ़ख्रो-नाज़ दोस्तों II
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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